गद्य शब्द की उत्पत्ति गद धातु के साथ यत जोड़ने से हुई है। गद्य का अर्थ है बोलना या कहना । विधा का अर्थ होता है प्रकार । गद्य की विधाओं से तात्पर्य गद्य के प्रकारों से है।
हिंदी गद्य साहित्य की विधाओं को दो भागों में बांट सकते हैं-
1. प्रमुख विधा
2. गौण विद्या
प्रमुख विधाएं-
1. नाटक
2. एकांकी
3. उपन्यास
4. कहानी
5. निबंध
6. आलोचना
गौण विधाएं-
1. जीवनी
2. आत्मकथा
3. यात्रा वृत्त
4. संस्मरण
5. रिपोर्ताज
6. रेखाचित्र
7. डायरी
8. भेंटवार्ता
प्रमुख गद्य विधाओं का संक्षिप्त परिचय
(1) नाटक
लेखन शैली के आधार पर नाट्य साहित्य की गिनती दृश्य काव्य के अंतर्गत की जाती है, क्युकी इसका प्रदर्शन रंगमंच पर ही हो सकता है, जिसे देखकर दर्शक पूर्णतः आनंद उठा सकते हैं। नाटक एक ऐसा साहित्य रूप है , जिसमे रंगमंच पर पात्रों के द्वारा किसी कथा का प्रदर्शन अभिनय ,दृश्य , सज्जा, संवाद, नृत्य, गीत आदि के माध्यम से किया जाता है। भारत में नाट्य साहित्य की बहुत पुरानी एवं समृद्ध परंपरा रही है।
हिंदी के प्रमुख नाटककार एवं नाटक
भारतेंदु हरिश्चंद्र- भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी
जयशंकर प्रसाद- अजातशत्रु, चन्द्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुव स्वामिनी
मोहन राकेश - आधे अधूरे, लहरों के राजहंस, आषाढ़ का एक दिन
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