नव वर्ष का नाम सुनते ही अचानक मन में कई दृश्य व सवाल अपने आप हमारी स्मृति पटल पर बनने लगते हैं। मन कई आकांक्षाओं को लेकर उत्सुक रहता है, तो अतीत को भुलाकर एक नवीन वर्ष के स्वागत को आतुर रहता है। मनुष्य इस नूतन वर्ष की शुरुआत बड़े हर्षोंउल्लास के साथ करने तत्पर रहता है।
मैं नूतन वर्ष के आगमन पर अपनी इस वर्तमान जिंदगी के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करने तथा पश्च अनुभूतियों व गलतियों का मूल्यांकन करना अत्यावश्यक समझता हूँ। यह वर्ष मेरे लिए अविस्मरणीय रहा है। मैंने इस वर्तमान वर्ष के शुरुआत में जो संकल्प लिया था उसे क्या मैंने सही अंजाम दिया है?
जवाब है नहीं।
मेरे जीवन में विभिन्न दृश्य इस वर्ष सामने आये। उनमें से कुछ अत्यंत प्रफुल्लित करने वाले क्षण थे, तो कुछ ऐसे क्षण भी आए। जिसने मेरे उर पर मधुर निरस आघात किये।
जीवन के इन विभिन्न घात- प्रतिघातों में भी कुछ ऐसे लोग थे जिन्होंने हमेशा मेरा मार्ग प्रशस्त किया है। उन लोगों में प्रथम पंक्ति में स्थान मेरे पूज्य माता- पिता का है। जिन्होंने हमेशा हर स्थिति में मेरा साथ दिया है। मैं उनके इन उपकारों का सदैव ऋणी रहूँगा। और उनकी इन स्नेह को उनकी आशाओं को कभी विस्मृत नहीं होने दूँगा।
मैं अपने पूज्य माताजी के सपनों को पूरा करने का सफल प्रयास इस नवीन वर्ष में करूँगा। जिन्होंने मेरे जीवन को अमूल्य बनाया है। उनके उपकारों का वर्णन करने हेतु मेरी यह कलम निः शब्द है।
द्वितीय पंक्ति में स्थान में स्थान मै अपने मित्रों को देना चाहूँगा। वे मेरे जीवन के अमूल्य रत्नों मे से एक है। जो हर परिस्थिति में मेरा मनोबल कम नहीं होने दिये।
"दोस्त जिंदगी की सबसे बेहतरीन मेडिसीन होते हैं। "
यह पंक्ति सर्वथा सार्थक है।
इस वर्ष एक और सुनहरा समय आया मेरे एम. ए. हिंदी साहित्य में प्रवेश का। इसके साथ ही मेरे जीवन में मेरे प्रिय गुरुजन आये। जिन्होंने अपने ज्ञान के दीपक से मुझे आलोकित किया।
साथ ही मेरे वे मित्र आये जो एम ए के पढ़ाई में मेरे साथ हैं। मैंने अब तक इनके साथ अपने जीवन के बेशकीमती पलों को जिया है।
मैं शांत सा रहने वाला लड़का, जिसको ज्यादा मौज मस्ती बिल्कुल पसंद नहीं थी। न जाने वह कब यकायक परिवर्तित हो गयी।
मैं अब पहले से ज्यादा बात करता हूँ और शायद मस्ती भी।
यह सब मेरे एम ए के मित्रों की वजह से हुआ है, जिनके साथ रहने से एक परिवार की अनुभूति होती है। घंटो कॉलेज के गार्डन में बैठ के बातें करना और दोपहर को सबका टिफिन खाना , यह सब जीवन के अनमोल क्षण हैं। जीवन में शायद ही कभी यह पल दोबारा आए। इन सब प्रकार की अनुभूति की कल्पना भविष्य में कर पाना मृगमरीचिका में जल प्राप्त कर पाने के समान है।
मैं अपने जीवन में हमेशा मेरे एम ए पूर्व के सभी मित्रों विशेष कर लुसिका, वंदना, रागिनी, राम मनोहर, एवन, निशिता, मधु, सीमा, निकिता,दुर्गा, टिकेश्वरी, हिमांशु, कमलेश, भूपेश, से अंत तक इसी प्रकार का साथ चाहूँगा।
भाई राम मनोहर की कलम से गत वर्ष बिताए अमूल्य पलों पर एक सुंदर सी रचना अपने दोस्तों को समर्पित है-
ये यादों की पन्ने और दोस्तों का साथ,
कभी न भूल पाऊंगा बीता हुआ साल।
कुछ पल जो आप सभी के
साथ बिताये,
वो लम्हें जो आप सभी ने मेरे यादगार बनाऐं,
कॉलेज से दूर होकर जो सभी मिलने को दिल मचलाऐ।
उन दिनो की वीडिओ कॉल मे कुछ मिन्टो की ढेर सारी बाते
याद आयेगी वो चौपाटी की बाते और मुलकाते ।
कभी न भूल पाऊगां ये बीता हुआ साल।
नव वर्ष २०२२ की आप साभी मित्रों को बहुत सारी शुभकामनाएं।।।।
राममनोहर।।
नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ। आने वाले इस नवीन वर्ष में आप सभी दृढ़ संकल्पित होकर अपने लक्ष्य की ओर तत्परता से अग्रसर होने की दिशा में कदम बढाईये।
लेखक -
तुलेश्वर कुमार यादव
एम. ए. पूर्व ( हिंदी साहित्य)
शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव
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