जीवन में कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जिन्हें शायद ही कभी भूला जा सकता है | और ऐसे अवसर जहाँ अलग - अलग लोगों से मिलना , साथ में ढ़ेर सारा समय बिताना और सभी लोगो से कुछ न कुछ सीखना , साथ में मस्ती करना ये सारे पल बहुत ही विलक्षण होते हैं , जो विरले ही दुबारा आते हैं | कुछ ऐसा ही एक अनुभव मुझे अपने डी.एल.एड की पढ़ाई के दौरान हुआ | मै शुरू से ही एकांतवादी व्यक्ति रहा हूँ शायद इसलिए ही किसी समूह का सक्रिय सदस्य बनने का अवसर मुझे अभी तक नहीं मिला था |
लेकिन इस वर्ष यह परंपरा टूटी और मुझे अपनी संस्था ( जिसे अगर कार्यशाला या प्रयोगशाला कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि यहाँ देश के भविष्य निर्माता यानी भावी शिक्षकों का निर्माण होता है ) में वार्षिक आयोजनों के लिए एक समूह में शामिल होने का अवसर मिला | प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ( जिन्हे हम यहाँ छात्राध्यापक कहते हैं ) को मिलाकर कुल 4 समूह बनाये गए थे जिनमें प्रत्येक समूह में लगभग 40 - 45 सदस्य थे | और हर समूह को एक नाम दिया गया था - सत्यम , शिवम् , सुंदरम और मधुरम | ये नाम हमारे भारतीय दर्शन से लिए गए हैं जो एक आदर्श जीवन और आदर्श समाज के प्रतीक हैं | और मुझे भी संयोग से एक ऐसे ही समूह का सदस्य बनने का अवसर मिला | सुंदरम - ये नाम सिर्फ एक समूह का नाम नहीं था बल्कि यह उस सौंदर्य बोध का प्रतीक था जहाँ सुंदरता सिर्फ देखने में नहीं बल्कि आपसी सहयोग , विचार , उद्देश्य अनुशासन और रचनात्मक अभिव्यक्ति में भी थी | मुझे हमारे इस समूह की सबसे अच्छी बात यह लगी कि यहां ‘ मै ‘ से अधिक ‘ हम ‘ की भावना को महत्त्व दिया गया | सामूहिकता की यही खूबसूरती होती है कि यहाँ व्यक्तिगत भार किसी पर नहीं होने दिया जाता बल्कि थोड़े - थोड़े प्रयास सभी करते हैं | हमारे समूह के द्वितीय वर्ष के हमारे सीनियर्स भी मिलनसार थे , न किसी में अहं था और न ही द्वैष की भावना | उन सभी ने बहुत कार्यकुशल तरीके से समूह का प्रतिनिधित्व किया और सभी को एक परिवार की तरह बाँध कर रखा जहाँ कोई गाँठ नहीं थी | चूँकि यह वार्षिक आयोजन एक प्रतिस्पर्धात्मक आयोजन था जहाँ विभिन्न विधाओं में कुल 3 दिवस तक आयोजन होना था , जिनमे खेल-कूद , संगीत , नृत्य , नाटक , रंगोली , पेंटिंग , भाषण इत्यादि शामिल थी | हमारे समूह में भी जोर शोर से तैयारी की गयी थी | सभी अलग - अलग विधाओं में हमारे समूह के श्रेष्ठ या जिन्हें रूचि थी उन प्रतिभागियों को तैयार किया गया था | यहाँ एक सबसे अच्छी बात मुझे ये लगी की हमारे समूह में किसी एक की सफलता पूरे समूह की सफलता थी , और हर सदस्य उतना ही प्रसन्न और उत्सुक दिखाई दे रहा था जितना प्रसन्न जीतने वाला प्रतिभागी था | प्रथम 2 दिवस खेलों का आयोजन हुआ | खेल के मैदान में खड़े हो अपने समूह के प्रतिभागी को Cheer करना एक कमाल का अनुभव था जो मैंने अपने अंतर्मन से महसूस किया था | समूह का हर सदस्य इतना ही उत्सुक था जितना मै | अंतिम दिवस में Indoor कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिनमे संगीत , नृत्य , नाटक आदि शामिल थे | यहाँ सभी समूह के सदस्यों ने अपनी - अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया जो किसी भी सुप्रशिक्षित कलाकारों से किसी भी दृष्टि में कमतर नहीं थी | और अंत में इन यादों को कैमरों की तस्वीरों में हमेशा के लिए कैद करके तथा इन अविस्मरणीय पलों को अपनी यादों में सहेज कर मै अपने घर की ओर रवाना हो गया |
लेखक 🖋 - तुलेश्वर यादव

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1 Comments
Bahut hi sundar
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