"उधार " कविता : अज्ञेय
सवेरे उठा तो धूप खिल कर छा गई थी और एक चिड़िया अभी-अभी गा गई थी। मैनें धूप से कहा: मुझे थोड़ी गरमाई दोगी उधार चिड़िया से कहा: थोड़ी मिठास उधार …
सवेरे उठा तो धूप खिल कर छा गई थी और एक चिड़िया अभी-अभी गा गई थी। मैनें धूप से कहा: मुझे थोड़ी गरमाई दोगी उधार चिड़िया से कहा: थोड़ी मिठास उधार …
कविता - " बावरा अहेरी " कवि - " अज्ञेय " भोर का बावरा अहेरी पहले बिछाता है आलोक की लाल-लाल कनियाँ पर जब खींचता है जा…
दोस्तों इस लेख में हम आपको अज्ञेय जी द्वारा रचित कविता " कलगी बाजरे की" इसकी व्याख्या करने जा रहे हैं। यह कविता अज्ञेय जी की प्रसिद्ध रचनाओ…
आज हम इस लेख में आपको भारत में धान का कटोरा कहे जाने वाले और अपनी विशिष्ट तथा अद्भुत संस्कृति के लिए जानी जाने वाली एक राज्य छत्तीसगढ़ की भाषा छत्त…
आज हम आपको छत्तीसगढ में बोले जाने वाली भाषा छत्तीसगढ़ी से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों से अवगत कराने जा रहे हैं। कीआखिर यह भाषा क्या है , इस भाषा की क…
आप सभी का हमारे वेबसाईट में स्वागत है। आज हम आपको अज्ञेय जी द्वारा रचित कविता " नदी के द्वीप" की व्याख्या उपलब्ध कराने जा रहे हैं। यह कवि…
दोस्तों हीरानंद सच्चिदानंद वात्स्यायन ’अज्ञेय’ द्वारा रचित "कविता कलगी बाजरे की " यह कविता मूलतः प्रेम और प्रकृति को अभिव्यक्त करती हैं। अ…
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